जानिए क्यों है हरीतकी (हरड) प्रकृति का अनुपम उपहार?
- By Janmejay Patel
- July 24, 2025
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अर्थात - हरीतकी (हरड) मनुष्यों के लिए माता के समान हित करने वाली होती है। जबकि माँ को भी कभी गुस्सा आ सकता है, पर पेट में स्थित हरीतकी (हरड) कभी हानि नहीं पहुँचाती है।
आयुर्वेद में कुछ ही जड़ी-बूटियों को हरीतकी (हरड) की तरह विशेष श्रद्धा और सम्मान प्राप्त है। इस प्राचीन श्लोक में बहुत सुंदरता से हरीतकी (हरड) की पोषक प्रकृति का वर्णन किया है। हरीतकी (हरड) को इसके त्रिदोशहर गुण और कई अन्य लाभों के कारण मातृतुल्य कहा गया है। इसकी कोमल देखभाल एक माँ के सौम्य स्पर्श की तरह है - हितकारिणी, पोषिका, जीवनदायिनी, और बदले में कभी कुछ न मांगने वाली!
हरीतकी (हरड) (Terminalia chebula) भारत में सबसे प्रचलित और सुलभ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक है, जिसका उपयोग विभिन्न रूपों में किया जाता है। प्राचीन काल से, हरीतकी (हरड) हमारे जीवन में घरेलू उपचार के साथ -साथ आयुर्वेदिक दवाओं के माध्यम से भी जुडी हुई है। इस लेख में, हम इसके इतिहास, उत्पत्ति, आयुर्वेदिक महत्व, लाभ, मौसमी उपयोग, और प्रभावी घरेलू उपयोगों के विषय में जानेंगे।
हरीतकी (हरड) क्या है? (What is Haritaki)
हरीतकी (हरड), जिसे हम भारत में आमतौर पर हरड़ के नाम से जानते हैं, आयुर्वेद की एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसे उसके ढेरों फायदे के लिए जाना जाता है। यह एक शीतल क्लीन्ज़र और रसायन है, जिसे आयुर्वेद में लंबे समय से शरीर की आतंरिक शुद्धि और संतुलन बनाए रखने के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इसमें प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट, रोग प्रतिरोधक क्षमता वर्धक, रक्त शर्करा को संतुलित रखने की क्षमता और हल्के रेचक वाले गुण पाए जाते हैं।
हरीतकी (हरड) एक फल है या जड़ी-बूटी?
हालाँकि हरीतकी (हरड) के तने की छाल, पत्तियाँ और बीज कभी-कभी पारंपरिक या स्थानीय उपचारों में उपयोग किए गए हैं, लेकिन आयुर्वेदिक औषधियों में इसके फल को ही हमेशा चिकित्सकीय रूप से सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग माना गया है। हरीतकी (हरड) / टर्मिनलिया चेबुला, जिसे आमतौर पर काला या चेबुलिक हरड़ के नाम से जाना जाता है, टर्मिनलिया की एक प्रजाति है, जो दक्षिण एशिया में भारत, पाकिस्तान और नेपाल से पूर्व में दक्षिण-पश्चिम चीन (युन्नान) तक और दक्षिण में श्रीलंका, मलेशिया और वियतनाम तक फैली हुई है, और हजारों वर्षों से आयुर्वेदिक उपचारों और प्रथाओं में एक प्रधान औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।
हरीतकी के प्रकार
आयुर्वेद में हरीतकी (हरड) के सात प्रकार बताये गए हैं, ये हैं:
प्रकार | रूप / स्वरूप | उपयोग |
---|---|---|
विजया | आलभुवृत्त (लौकी जैसा अंडाकार) | सर्व रोगों में उपयोगी; सभी हरितकी प्रकारों में श्रेष्ठ। |
रोहिणी | वृत्त (गोल) | व्रणरोपण (घाव भरने में सहायक) |
पूतना | अस्थिमति (बड़ा बीज), सूक्ष्म (छोटा) | प्रलेप (लेप बनाने हेतु) |
अमृता | मांसला (मांसल / गूदा युक्त) | शोधन (शुद्धिकरण हेतु) |
अभया | पंचरेखा (पाँच कोने वाली) | अक्षिरोग (नेत्र विकारों) |
जीवंती | स्वर्णवर्ण (सुनहरा रंग) | सर्वरोगों में उपयोगी |
चेतकी |
त्रिरेखा (तीन कोनों वाली) दो प्रकार: 1. श्वेता (श्वेतवर्ण): षडंगुल (6 अंगुल लंबी) 2. कृष्णा (कृष्णवर्ण): एकांगुल (1 अंगुल लंबी) |
चूर्ण- इस प्रकार की हरितकी की छाया से गुजरने मात्र से भी पशुओं में भेदन (विरेचन) होता है। इसे हाथ में पकड़ने से भी ऐसा प्रभाव होता है। |
हरीतकी (हरड) (Terminalia chebula) नाम का महत्व
लोकप्रिय रूप से "औषधियों का राजा" कहलाती हरीतकी (हरड) को निम्नलिखित नामों से भी जाना जाता है: हैमवती, शिवा, पथ्या, अभया, कायस्थ, श्रेयसी, चेतकी, अमृता, विजया, आदि। ‘हरीतकी (हरड)’ नाम का अर्थ है "जो रोगों को दूर करती है"। इसके लिए एक आयुर्वेदिक निरुक्त इस प्रकार है:
इसका अर्थ है, "यह महादेव के (हिमालयी) क्षेत्र से उत्पन्न होती है और स्वभाव से हरी होती है। यह सभी रोगों को हर लेती है और इसलिए इसे हरीतकी (हरड) कहा जाता है"।
इसे हिंदी में हरड़, मराठी में हिरदा, तमिल में कड़ुक्कै, तेलुगु में कारक्कई, कन्नड़ में अललेकई और अंग्रेजी में माय्रोबालन या चेबुलिक माय्रोबालन भी कहा जाता है।
क्या आप जानते हैं? "औषधियों के राजा" हरीतकी (हरड) से जुड़ी दिलचस्प पौराणिक कथाएँ (Haritaki in the Legends)
अपने अनेकों लाभों से परे, हरीतकी (हरड) प्राचीन परंपराओं में एक पवित्र स्थान रखती है, जिसकी दिव्य उत्पत्ति को समझाने वाली मनमोहक किंवदंतियाँ हम यहाँ आपसे साझा करते हैं:
देवताओं का अमृत:
सबसे प्रमुख किंवदंती के अनुसार, हरीतकी (हरड) एक दिव्य अमृत की बूँद से उत्पन्न हुई, जो स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरी थी। कुछ कहानियाँ कहते हैं कि यह भगवान इंद्र के प्याले से गिरी थी, जबकि कुछ अन्य इसका श्रेय भगवान ब्रह्मा के मुख से गिरी सात बूँदों को देते हैं। यह उत्पत्ति कथा हरीतकी (हरड) को एक ऐसी पूजनीय और "दिव्य औषधि" का दर्जा देती है जो जीवन शक्ति और दीर्घायु प्रदान करती है।

भगवान शिव का उपहार:
एक अन्य व्याख्या हरीतकी (हरड) को भगवान शिव (हर) से जोड़ती है, यह कहते हुए कि इसकी उत्पत्ति हिमालय में उनके पवित्र निवास से हुई थी। यह संबंध इसकी गहन उपचार और परिवर्तनकारी शक्तियों को रेखांकित करता है, जो शिव के अपने ब्रह्मांडीय गुणों को दर्शाता है।

औषधि बुद्ध का प्रतीक:
तिब्बती बौद्ध परंपरा में औषधि बुद्ध (भैषज्यगुरु) को हरीतकी (हरड) फल धारण किए हुए दर्शाया गया है। यह इसकी सार्वभौमिक उपचार प्रभावकारिता का प्रतीक है, जो विभिन्न विधियों से शारीरिक और मानसिक, सभी प्रकार के कष्टों को दूर करने में सक्षम है।
आयुर्वेद में हरीतकी (Terminalia chebula) की महत्ता (Haritaki’s Ayurvedic Significance)
शास्त्रीय आयुर्वेदिक ग्रंथों, जैसे कि चरक संहिता और भावप्रकाश निघण्टु में, हरीतकी (हरड) को रसायन के रूप में इस प्रकार वर्णित किया गया है - एक ऐसी कायाकल्पी औषधि जो शरीर में ओजस और अंदरूनी संतुलन बनाये रखने में सहायता करती है। हरीतकी (हरड) त्रिदोष अर्थात वात, पित्त, और कफ को संतुलित रखने और उनका सामंजस्य बनाये रखने में उपयोगी होती है। इसी कारण इसे आयुर्वेदिक फार्माकोपिया में सबसे बहु-गुणी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक माना जाता है।
हरीतकी (हरड़) के गुण-कर्म (Properties and Actions of Haritaki)
आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित हरीतकी (हरड) के गुण-कर्म इस प्रकार हैं:
रस (Taste)
> कषाय अर्थात कसैला (Astringent) - प्रमुख रस, शोधक, वैसे तो यह वात बढ़ाती है किन्तु इसके मधुर विपाक के कारण वह संतुलित रहता है।
> मधुर अर्थात मीठा (Sweet) - पोषक, बलवर्धक।
> अम्ल अर्थात खट्टा (Sour) - पाचक, वातनाशक।
> कटु अर्थात तीखा (Pungent) - दीपन, कफघ्न।
> तिक्त अर्थात कड़वा (Bitter) - शोधक, पित्तघ्न।
गुण (Qualities)
> लघु अर्थात हल्का (Light) - सुपाच्य, शरीर में हल्कापन लाती है।
> रूक्ष अर्थात रूखा (Dry) - अतिरिक्त नमी और कफ को सोखती है।
> सर अर्थात गतिशील/प्रवाही (Mobile/Flowing) - मल प्रवर्तन में सहायक है, मृदु विरेचक है।
वीर्य (Potency)
> उष्ण अर्थात गर्म (Hot) - अग्नि को बढ़ाती है, आम पाचन करती है, वात-कफ शामक है।
विपाक (Post-Digestive Taste)
> मधुर अर्थात मीठा (Sweet) - धातुओं का पोषण करती है, रसायन गुण को दर्शाती है।
श्रेणी | विशेषता |
---|---|
रस (Taste) |
कषाय अर्थात कसैला (Astringent) - प्रमुख रस, शोषक, वैसे तो यह वायु बढ़ाता है किंतु इसके मधुर विपाक के कारण वह संतुलित रहता है। मधुर अर्थात मीठा (Sweet) - पोषक, बलवर्धक। अम्ल अर्थात खट्टा (Sour) - पाचक, वातनाशक। कटु अर्थात तीखा (Pungent) - दीपक, कफघ्न। तिक्त अर्थात कड़वा (Bitter) - शोषक, पित्तघ्न। |
गुण (Qualities) |
लघु अर्थात हल्का (Light) - सुपाच्य, शरीर में हलकापन लाती है। रूक्ष अर्थात रूखा (Dry) - अतिरिक्त नमी और कफ को सोखती है। सर अर्थात गतिशील/प्रवाही (Mobile/Flowing) - मल प्रवर्तन में सहायक है, मधु विरसेचक है। |
वीर्य (Potency) | उष्ण अर्थात गर्म (Hot) - अग्नि को बढ़ाती है, अन्न पाचन करती है, वात-कफ शान्तक है। |
विपाक (Post-Digestive Taste) | मधुर अर्थात मीठा (Sweet) - धातुओं का पोषण करती है, स्निग्ध गुण को दर्शाती है। |
हरीतकी (Terminalia chebula), आयुर्वेद के प्रसिद्ध त्रिफला योग के प्रमुख अवयवों में से एक है, जो शरीर का आंतरिक संतुलन बनाए रखने और उसकी शुद्धिकरण प्रक्रिया को सहज रूप से सहयोग देने के लिए जानी जाती है। अक्सर "पथ्यानाम हरीतकी (हरड)" या "औषधियों का राजा" कहलाती हरीतकी (हरड) अपने असाधारण चिकित्सीय लाभों और कायाकल्प व शुद्धिकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण आयुर्वेदिक मटेरिया मेडिका में लगातार शीर्ष पर रहा है।
हरीतकी (हरड) कैसे करता है शरीर की प्राकृतिक देखभाल
सदियों से, हरीतकी (हरड) हमारी दैनिक और ऋतु दिनचर्या में एक कोमल और अत्यंत सहायक जड़ी बूटी के रूप में प्रतिष्ठित है। शास्त्रीय ग्रंथों में हरीतकी (हरड) के अनुप्रयोगों का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह शरीर की आंतरिक प्रक्रियाओं को सहज और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। इसके गुण बहुत प्रभावशाली होते हैं, किन्तु शरीर पर इसका प्रभाव बेहद कोमल और संतुलित होता है, इसलिए यह दैनिक उपयोग के लिए भी उपयुक्त है।
चलिए समझते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार हरीतकी (हरड) के क्या प्रभाव होते हैं और कैसे इसका परंपरागत रूप से उपयोग किया जाता रही है:
1. त्रिदोषघ्न (Balances all three Doshas) - तीनों दोषों को शांत करने वाली, वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित करती है।
2. रसायन (Rejuvenative) - कायाकल्प करने वाली, दीर्घायु, स्वास्थ्य और शक्ति प्रदान करती है।
3. चक्षुष्य (Good for eyes) - आँखों के लिए हितकारी, नेत्र ज्योति बढ़ाती है।
4. मेध्य (Promotes intellect) - बुद्धिवर्धक, स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ाती है।
5. अनुलोमन (Promotes downward movement of Vata) - अधोगामी गति को बढ़ाती है, मल, मूत्र, वायु का सही निष्कासन करती है।
6. दीपन (Stimulates digestive fire) - पाचक अग्नि को उत्तेजित करती है, भूख बढ़ाती है।
7. पाचन (Digests toxins) - आम (toxins) का पाचन करने वाली, शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटाती है।
8. स्रोत-विशोधन (Cleanses channels) - चैनलों को साफ करने वाली, शरीर के सूक्ष्म और स्थूल चैनलों को अवरोध मुक्त करती है।
हरीतकी (हरड) की यही सौम्य और ममता भरी देखभाल इसे नियमित दिनचर्या में संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एक पसंदीदा विकल्प बनाते हैं।